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ये कम्बक्त मोहब्बत

बड़ी आसानी से दिल लगाये जाते है,
पर बड़ी से वादे निभाए जाते हैं..


ले जाती है मोहब्बत उन राहो पर,
जहाँ दिए नहीं दिल जलाये जाते है... 


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कभी आशूं कभी खुसबू (kabhi aashon kabhi khushboo )

कभी आशूं कभी खुसबू कभी नग्मा बनकर
हमसे हर शाम मिली है तेरा चेहरा बनकर 

चाँद निकला है तेरी आँखों के आशूं की तरह,
फूल महके हैं तेरी ज़ुल्फ़ का साया बनकर..

मेरी जगी हुई रातों को उसी की है तलाश,
सो रहा है मेरी आँखों में जो सपना बनकर,

दिल के कागज पर उतरा है जो शेरों की तरह
      मेरे होटों पे मचलता है जो नग्मा बनकर.....

कैसे दिल से निकाल दु

कभी कभी दिल उदाश हो जाता है,
जब जब उसका ख्याल आता है..

कैसे भूलू उसको, कैसे दिल से निकाल दु,
कुछ समझ नहीं आता आखिर ये दिल चाहता क्या है...

मर-मर कर जीता रहा मैं (mar mar kar jeeta raha main)

पल पल तन्हाई में तडपता रहा,
तेरी यादों के तुफानो से लड़का रहा,
कोई पूछता तो केहता ठीक हूँ मैं,
कौन जाने कैसे मर-मर कर जीता रहा मैं...




मुझे आशुं देकर मुस्कुरा लेता है (mujhe anshu de kar muskura leta hai)

मुझे दर्द देकर वो चैन पता है,
बिना आग के हि वो मुझे जला देता है,
दर्द नहीं होता मुझे कोई, वो जब
मुझे आशुं देकर मुस्कुरा लेता  है खुद.......

उस माँ को तुम भूल ना जाना (us maa ko tum bhul naa jaana )

खुदा की रेहमत है हमपर जो उनका प्यार मिला,
जन्नत से हसीन कई यादों का उपहार मिला,
क्यूं करें हम उस खुदा से अब कोई सिकवा कोई गीला,
जिसने हमको माँ का प्यार दिलाया जिसको पाकर मैं और तू खिलां..


क्यूं भोल जातें है हम उस माँ को वक्त के साथ साथ,
नहीं रेहता है हमको उनका कोई ख्याल,
क्या  होता होगा उस माँ के दिल का हाल,
जिसने हमारे लिए भुला दिया अपना हर एक ख्वाब...


क्यूं ख्याल नहीं रेहता हमको उनका,
वो तो बस हर पल हमारी याद करती है,
जब भी जाती है किसी मन्दिर या मस्जिद में,
सबसे पहले हमारी सलामती की दुवा करती है.........


क्या बजूद होगा हमारा जो हम उनको भूल  जाएँ,
फिर कभी तन्हाई में हम खुद को हि तडपाएं..,
रोयें हम बेहिंसाब कोई आंशु पोछने ना आये,
खुद को  यूहीं  कोष ते रहे और बस पछताएं...


इसीलिए चाहे कुछ भी हो आगे,
उस माँ को तुम भूल ना जाना,
मौक़ा मिले जब भी कोई तुम्हे,
उस माँ को खुसी दिए जाना,
खुशी हो या गम के बादल,
सदा खुश रहना और मुस्कुराना...........

तडपती है ये साशें हर पल तेरी जुदाई में tadpati hai ye saanshehar pal teri judai mein

तडपती है ये साशें हर पल तेरी जुदाई में,
परेसान है ये दिल हर तरफ़ फैली तन्हाई में,
ना जीने की तम्मना है ना कोई ख्वाबों का बसेरा है,
बेजान बन गया है दिल तेरी रुसवाईं में......
                                                                                                                              
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