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हमें कोई गम नहीं था गम ऐ-आशिकी से पहले.
हमें कोई गम नहीं था गम ऐ-आशिकी से पहले,
ना था दुश्मनी किसी से तेरी दोस्ती से पहले..
है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कसूर इस में,
तेरे गम ने मार डाला मुझे जिन्दगी से पहले,
मेरा प्यार जल रहा है अै चाँद आज छुप जा..
किसी से प्यार था हमें भी तेरी चाँदनी से पहले..
मैं कभी ना मुस्कुराता जो मुझे ये मालूम होता,
के हजारों गम मिलेंगे मुझे एक खुसी से पहले..
ये अजीब इम्तिहान है के तुम्ही को भूलना है,
मिले कब थे इस तरह हम तुम्हे बे-दिली से पहले..
हमें कोई गम नहीं था गम ऐ-आशिकी से पहले....!!!
तन्हा है मेरा हाथ तेरा हाथ चाहिए
खामोश रहूँ मैं, तेरा साथ चाहिए,
तन्हा है मेरा हाथ तेरा हाथ चाहिए,
मुझको मेरे मुकद्दर पर इतना येकीन तो है,
तूझको भी मेरे लफ्ज़ मेरी बात चाहिए,
मैं खुद अपनी शायरी को क्यों अच्छा कहूँ,
मुझको तेरी तारीफ तेरी दाद चाहिए,
एहसाश ऐ-मोहब्बत तेरे वास्ते है लेकिन,
जूनून ऐ-इक्स को तेरी सौगात चाहिए,
तू मुझको पाने की खोवाहिश रखती है,
मुझको जीने के लिए तेरी मुलाकात चाहिए,
तन्हा है मेरा हाथ तेरा हाथ चाहिए,
मुझको मेरे मुकद्दर पर इतना येकीन तो है,
तूझको भी मेरे लफ्ज़ मेरी बात चाहिए,
मैं खुद अपनी शायरी को क्यों अच्छा कहूँ,
मुझको तेरी तारीफ तेरी दाद चाहिए,
एहसाश ऐ-मोहब्बत तेरे वास्ते है लेकिन,
जूनून ऐ-इक्स को तेरी सौगात चाहिए,
तू मुझको पाने की खोवाहिश रखती है,
मुझको जीने के लिए तेरी मुलाकात चाहिए,
मेरी हर एक धड़कन आप के लिए है
मेरी हर एक धड़कन आप के लिए है
मेरी हर एक मुस्कुराहट आप के लिए है
आप के अदा मेरे दिलको चुराने के लिए है
अब तोह मेरी ये ज़िन्दगी भी आप के लिए है
जैसे सूखे गुलाब मिलते है किताबों में!!
हर यादों में उसी की याद रहती है,
मेरी आँखों को उसी की तलाश रहती है,
कुछ तुम भी दुआ करो यारों,
सुना है दोस्तों की दुआ में
फरिश्तो की फरियाद होती है…
मेरी हर एक मुस्कुराहट आप के लिए है
आप के अदा मेरे दिलको चुराने के लिए है
अब तोह मेरी ये ज़िन्दगी भी आप के लिए है
जैसे सूखे गुलाब मिलते है किताबों में!!
सालों बाद नजाने क्या समां होगा
हम सब दोस्तों में से नजाने कौन कहाँ होगा
फिर मिलना हुआ तो मिलेंगे खवाबो में
जैसे सूखे गुलाब मिलते हें किताबों मैं...
कुछ तुम भी दुआ करों यारों !!
मेरी आँखों को उसी की तलाश रहती है,
कुछ तुम भी दुआ करो यारों,
सुना है दोस्तों की दुआ में
फरिश्तो की फरियाद होती है…
कभी आशूं कभी खुसबू (kabhi aashon kabhi khushboo )
कभी आशूं कभी खुसबू कभी नग्मा बनकर
हमसे हर शाम मिली है तेरा चेहरा बनकर
चाँद निकला है तेरी आँखों के आशूं की तरह,
फूल महके हैं तेरी ज़ुल्फ़ का साया बनकर..
मेरी जगी हुई रातों को उसी की है तलाश,
सो रहा है मेरी आँखों में जो सपना बनकर,
दिल के कागज पर उतरा है जो शेरों की तरह
मेरे होटों पे मचलता है जो नग्मा बनकर.....
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