ललित साह
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कोई करे या ना करे
मुझे भी कोई याद कर रही होगी,
अपनी सपनों में सजा रही होगी,
कोई करे या ना करे....
वो मेरा इन्तजार ज़रूर कर रही होगी...
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ललित साह
इस दुनिया ने यूँ हमको सताया था
बर्बाद हो गए थे हम,
इस दुनिया ने यूँ हमको सताया था,
हर एक मोड पे हम गिरते थे..
किसी ने भी ना हमको उठाया था...
तब तुने ही सनम एक उम्मीद का दिया जलाया था..
अपने हर एक गम को छुपाकर मुझे जीना सिखाया था......!!!
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ललित साह
तेरी जुदाई में हर रोज मरता है कोई
याद में तेरी आंखे भरता है कोई..
हर सांश के साथ तुझे याद करता है कोई...
मौत ही अैसी चीज़ है जिसको आना ही है,
लेकिन तेरी जुदाई में हर रोज मरता है कोई...!!!
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ललित साह
अगर समझ जाते वो समझाने से
अगर समझ जाते वो समझाने से,
मान जाते वो मनाने से...
तो क्योँ दिल तनहा होता क्यूं कदम बेहक जाते,
लौट आते अगर वो हर्ष के भुलाने से....
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ललित साह
यकींन पे यकींन दिलाते है दोस्त
यकींन पे यकींन दिलाते है
दोस्त,
राह चलते को बेवखुफ़ बनाते है
दोस्त,
शरबत बताकर दारू पिलाते है
दोस्त,
पर जो कुछ भि हो..
ǝןɐs बहुत याद् आते है
दोस्त..
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ललित साह
जब कोई एहमियत ना रही जीने की
जब कोई एहमियत ना रही जीने की,
जब किसी को अफ़सोस ना रहा मेरे मरने का,
फिर क्योँ उनके बगैर मैंने जीना नहीं चाहा,
तो फिर क्योँ उनके जीने के लिए मैंने मरना चाहां....
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ललित साह
आपको दुल्हन बनाकर
दिल को घर बनाकर,
आपको दुल्हन बनाकर,
एक सपना देखा था...
मोहब्बत हुई आपसे
आप में कोई अपना देखा था..
ख्वाबों में ख्वाओं के फूल खिले थे,
चाहता के महक थी,
जिन्दगी संग यूँ जिन्दगी जीना
और मर जाना देखा था......!!!
©
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